from Taj city
शुक्रवार, 8 अक्टूबर 2010
सिर्फ आप के लिए
किसी की मुहब्बत को किसी का पैगाम लिखते हैं
हम आज अपनी कलम से एक कलाम लिखते हैं
भूल जाते हैं लोग मुहब्बत करने के बाद
हम आज भी अपनी मुहब्बत को अपना सलाम लिखते हैं
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